तेजाब हमले के पीड़ितों को रेल यात्रा के किराए में रियायत देने के मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि तेजाब हमला पीड़ितों के लिए रेल यात्रा में रियायत की व्यवस्था को औपचारिक नीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसी सुविधा से पीड़ित अपने इलाज के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पतालों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए नीति मसौदे पर विचार किया। अदालत ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत आने वाले दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को भी अंतिम नीति तैयार करने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने बताया कि सरकार तेजाब हमला पीड़ितों को रेल किराए में रियायत देने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है। केंद्र ने संबंधित पक्षों, जिसमें याचिकाकर्ता गैर-सरकारी संगठन अतिजीवन सोसाइटी भी शामिल है, के साथ विचार-विमर्श के बाद नीति का मसौदा तैयार किया है।
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सरकार का प्रस्ताव इस सुविधा को ‘मरीज श्रेणी’ के तहत देने का है। केंद्र का कहना है कि तेजाब हमला पीड़ितों को अलग दिव्यांग श्रेणी में रखने को लेकर कुछ व्यावहारिक आपत्तियां हैं, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में उस श्रेणी के अन्य लोगों को रेलवे किराए में रियायत उपलब्ध नहीं है।
इससे पहले 13 अगस्त को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह इस मुद्दे पर नीति बनाने के लिए तैयार है। अदालत ने रेलवे मंत्रालय से पीड़ितों के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाने को कहा था और नीति का मसौदा छह सप्ताह में रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था।
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