महिला आरक्षण विधेयक पर अहम मतदान से पहले संसद में तीखी बहस देखने को मिली, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रहा है।
सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्ष का कहना है कि परिसीमन प्रक्रिया से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच असंतुलन बढ़ सकता है, जिससे दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों की राजनीतिक ताकत कम हो सकती है। हालांकि, उन्होंने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए इसके लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए।
वहीं सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 815 हो जाएंगी, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी दी कि महिला आरक्षण का विरोध करने की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
इसी बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सवाल उठाया कि वर्तमान 543 सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं लागू किया गया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग की।
संसद में इस मुद्दे पर टकराव जारी है और मतदान के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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