लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और समाजवादी पार्टी ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित नहीं होने दिया और इसके बाद उनकी “जीत के जश्न” जैसी प्रतिक्रिया अत्यंत निंदनीय है।
अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था, लेकिन विपक्ष ने इसे रोककर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि देश की “नारी शक्ति” का अपमान है, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
गृह मंत्री ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब विपक्ष ने महिलाओं के हितों के खिलाफ रुख अपनाया हो। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का रवैया लंबे समय तक नहीं चलेगा और विपक्ष को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। शाह ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव ही नहीं, बल्कि हर स्तर पर विपक्ष को महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का अवसर खो दिया गया है और विपक्ष की मानसिकता देश और महिलाओं के हित में नहीं है।
इससे पहले लोकसभा में हुए मतदान में 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया था, लेकिन यह आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं कर सका। इसके चलते विधेयक पारित नहीं हो सका।
सरकार ने इसे 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने के उद्देश्य से लाया था, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने और विधानसभा में भी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की योजना थी।
विधेयक के गिरने के बाद सदन में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है तथा दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
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