दिल्ली की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के अदालत में पेश होने से इनकार करने के बाद पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब एक आम नागरिक को न्याय नहीं मिलता है, तो उसके पास आखिर क्या विकल्प बचते हैं।
एक साक्षात्कार में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आतिशी ने केजरीवाल के फैसले का समर्थन किया और इसे महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने ‘सत्याग्रह’ का रास्ता चुना है, जो अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध का एक मजबूत माध्यम है।
आतिशी ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश की न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन जब लोगों को न्याय मिलने में संदेह होता है, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। उन्होंने इस संदर्भ में आम लोगों की भावनाओं को सामने रखते हुए कहा कि न्याय की उम्मीद टूटने पर लोग वैकल्पिक रास्तों की ओर देखने लगते हैं।
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गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में पेश होने से इनकार करते हुए कहा था कि उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है। उन्होंने यह निर्णय अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया और गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराने की बात कही।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर विपक्ष इस फैसले की आलोचना कर रहा है, वहीं समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत एक वैचारिक विरोध मान रहे हैं।
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