राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि मुगल सेना पीछे हट गई थी, तो इसे स्पष्ट रूप से महाराणा प्रताप की विजय माना जाना चाहिए। मोहन भागवत ने हल्दीघाटी युद्ध को “निर्विवाद जीत” बताते हुए कहा कि इतिहास की व्याख्या लंबे समय से पक्षपातपूर्ण तरीके से की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के ऐतिहासिक आख्यानों में कई बार विदेशी आक्रमणकारियों को अधिक महिमामंडित किया गया, जबकि देश के मूल शासकों और योद्धाओं के योगदान को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। उनके अनुसार, इतिहास को संतुलित और तथ्य आधारित दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है।
मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि महाराणा प्रताप ने मुगल साम्राज्य के खिलाफ साहस और स्वाभिमान के साथ संघर्ष किया और हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई केवल सैन्य संघर्ष नहीं थी, बल्कि स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की रक्षा का प्रतीक थी।
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आरएसएस प्रमुख के इस बयान के बाद ऐतिहासिक व्याख्याओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि हल्दीघाटी युद्ध का परिणाम जटिल था, जबकि भागवत ने इसे स्पष्ट रूप से महाराणा प्रताप की नैतिक और रणनीतिक जीत बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के युवाओं को अपने इतिहास को सही दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है, ताकि वे अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा ले सकें।
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