भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में बेंगलुरु मेट्रो रेल निगम लिमिटेड के बेंगलुरु मेट्रो के पहले और दूसरे चरण के क्रियान्वयन से जुड़ी कई कमियों को सामने रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना की योजना बनाते समय यात्रियों की संभावित संख्या का अनुमान वास्तविक आंकड़ों की तुलना में अधिक लगाया गया था। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में भी देरी हुई, जिसका असर परियोजना के क्रियान्वयन पर पड़ा।
बेंगलुरु मेट्रो रेल निगम लिमिटेड भारत सरकार और कर्नाटक सरकार का 50:50 संयुक्त उपक्रम है। मेट्रो के पहले चरण का वाणिज्यिक संचालन अक्टूबर 2011 से चरणबद्ध तरीके से शुरू हुआ था। जून 2017 तक पहला चरण पूरी तरह से चालू हो गया और इसकी कुल लंबाई 42.30 किलोमीटर थी।
कैग की रिपोर्ट में परियोजना की योजना और क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया गया। यात्री संख्या का अधिक अनुमान लगाए जाने से परियोजना की मांग और संभावित राजस्व का आकलन प्रभावित होने की बात सामने आई। ऐसी परियोजनाओं में यात्री संख्या का सही अनुमान महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी आधार पर क्षमता, निवेश और परिचालन संबंधी योजनाएं तैयार की जाती हैं।
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रिपोर्ट में भूमि अधिग्रहण में देरी को भी परियोजना के सामने आई प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया गया है। भूमि उपलब्ध कराने में देरी का सीधा असर निर्माण कार्य की गति और परियोजना के निर्धारित लक्ष्यों पर पड़ सकता है। इससे लागत और समयसीमा पर भी अतिरिक्त दबाव पैदा होने की संभावना रहती है।
बेंगलुरु में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार शहर की बढ़ती परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। ऐसे में कैग की रिपोर्ट परियोजनाओं की बेहतर योजना, समय पर भूमि अधिग्रहण और यात्रियों की मांग के यथार्थ आकलन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों से भविष्य की मेट्रो परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सबक मिलने की उम्मीद है।
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