स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इस बार केवल 10 खेलों का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की लागत कम करने के उद्देश्य से क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती, टेबल टेनिस, स्क्वैश, ट्रायथलॉन, बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवन्स समेत नौ खेलों को कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया है। इससे भारत की पदक जीतने की संभावनाओं पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।
भारत इस बार 125 सदस्यीय दल के साथ खेलों में भाग ले रहा है। भारतीय दल की अगुआई ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा और ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू कर रहे हैं। हालांकि, बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी और कुश्ती जैसे खेल हटने के कारण पी. वी. सिंधु, मनु भाकर, हरमनप्रीत सिंह और अमन सहरावत जैसे कई प्रमुख खिलाड़ी इस संस्करण में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
इस बार प्रतियोगिता में केवल एथलेटिक्स, तैराकी, ट्रैक साइक्लिंग, भारोत्तोलन, 3x3 बास्केटबॉल, लॉन बाउल्स, नेटबॉल, कलात्मक जिम्नास्टिक, जूडो और मुक्केबाजी को शामिल किया गया है। इनके साथ कुछ पैरा स्पर्धाओं का भी आयोजन होगा।
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ग्लासगो में खेलों का स्वरूप सीमित करने का फैसला तब लिया गया, जब ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य ने 2023 में बढ़ती लागत का हवाला देते हुए मेजबानी से हटने का निर्णय लिया। इसके बाद ग्लासगो ने सीमित संसाधनों और कम तैयारी समय के कारण छोटे प्रारूप में खेलों की मेजबानी स्वीकार की।
बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 61 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया था। इनमें से बड़ी संख्या उन खेलों से आई थी, जिन्हें अब कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, कुश्ती में 12, टेबल टेनिस में 7, बैडमिंटन में 6, हॉकी में 2 और स्क्वैश में 2 पदक मिले थे।
इसके अलावा, शूटिंग और तीरंदाजी भी इस बार कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, जिससे भारत के लिए पदकों के अवसर और कम हो गए हैं। हालांकि, यह प्रतियोगिता वर्ष के अंत में जापान में होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं, भारत वर्ष 2030 में अहमदाबाद में अगले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा।
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