गुजरात यूनिवर्सिटी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की कैटेगरी-2 ग्रेडेड स्वायत्तता प्रदान की गई है। यह उपलब्धि हासिल करने वाली गुजरात की यह पहली और एकमात्र राज्य विश्वविद्यालय बन गई है। इस मान्यता के बाद विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
यूजीसी ने यूजीसी (विश्वविद्यालयों का वर्गीकरण केवल ग्रेडेड स्वायत्तता प्रदान करने के लिए) विनियमों के तहत गुजरात यूनिवर्सिटी को यह दर्जा दिया है। इस स्वायत्तता से विश्वविद्यालय को शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
गुजरात के शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय को बधाई देते हुए कहा कि यह राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि स्वायत्तता मिलने से विश्वविद्यालय में शोध कार्यों, नई तकनीकों और नवाचार आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार लगातार शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और वैश्विक स्तर की सुविधाएं विकसित करने पर ध्यान दे रही है। गुजरात यूनिवर्सिटी को मिली यह मान्यता राज्य में उच्च शिक्षा के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
कैटेगरी-2 ग्रेडेड स्वायत्तता के तहत विश्वविद्यालय को नए पाठ्यक्रम तैयार करने, अनुसंधान गतिविधियों को विस्तार देने और उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। इससे छात्रों को रोजगार आधारित और आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब संस्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। स्वायत्तता मिलने के बाद विश्वविद्यालय वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग, संयुक्त शोध परियोजनाओं और नई शैक्षणिक पहलों को आगे बढ़ा सकेगा।
गुजरात यूनिवर्सिटी की स्थापना 1949 में हुई थी और यह राज्य के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल है। विश्वविद्यालय में हजारों छात्र विभिन्न विषयों में अध्ययन कर रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी की यह मान्यता विश्वविद्यालय को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी और भारत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को मजबूती देगी।
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