भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि मिशन के लिए आवश्यक मानव-सुरक्षा प्रणालियों के विकास और परीक्षण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा कि मानव रेटेड प्रक्षेपण यान एचएलवीएम3 के सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा जमीनी परीक्षण पूरा हो चुका है। क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रणोदन तंत्र विकसित, परीक्षण और प्रमाणित किए जा चुके हैं। पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली, ताप सुरक्षा प्रणाली, अवतरण प्रणाली, क्रू मॉड्यूल को सीधा करने वाली प्रणाली और संपूर्ण एवियोनिक्स जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का भी सफल परीक्षण किया गया है।
अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्रू एस्केप सिस्टम के सभी पांच प्रकार के मोटर विकसित कर स्थैतिक परीक्षण से गुजारे जा चुके हैं। मिशन के लिए ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केंद्र, क्रू प्रशिक्षण सुविधा और दूसरे प्रक्षेपण परिसर में जरूरी बदलाव भी पूरे किए गए हैं।
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मंत्री ने बताया कि टीवी-डी1 परीक्षण मिशन के जरिए क्रू एस्केप सिस्टम का उड़ान के दौरान सफल सत्यापन किया गया। सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल के साथ दो एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षणों ने अवतरण प्रणाली को भी प्रमाणित किया है। अगले परीक्षण मिशन टीवी-डी2 की तैयारियां जारी हैं।
मिशन की योजना के अनुसार, 2026 की चौथी तिमाही में पहला मानवरहित प्रयोगात्मक गगनयान मिशन भेजने का लक्ष्य है। इसमें अर्ध-मानवरूपी रोबोट व्योममित्र को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसके बाद 2027 तक दो और मानवरहित मिशन प्रस्तावित हैं, जिनके बाद भारत अपना पहला मानवयुक्त कक्षीय मिशन शुरू करेगा।
भारत की दीर्घकालिक योजना के तहत भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को 2035 तक परिचालन में लाने का लक्ष्य है। इस पांच मॉड्यूल वाले स्टेशन के पहले मॉड्यूल बीएएस-01 के विकास और प्रक्षेपण को सरकार मंजूरी दे चुकी है।
सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के आठ मिशनों के लिए 20,193 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी थी। कार्यक्रम में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी, ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी, फ्रांस के सीएनईएस और रूस के रोसकॉसमॉस के साथ सहयोग भी शामिल है।
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