स्विट्ज़रलैंड के आल्प्स पर्वतीय क्षेत्र में इस सप्ताह विश्व की राजनीति और कारोबार से जुड़े दिग्गजों का जमावड़ा होने जा रहा है। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सबसे अधिक निगाहें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी पर टिकी हैं, जो छह साल बाद पहली बार विश्व आर्थिक मंच (WEF) के वार्षिक सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार को मुख्य भाषण देंगे और इसके बाद एक उच्चस्तरीय रिसेप्शन की मेज़बानी करेंगे। इस विशेष रिसेप्शन में भारत के सात प्रमुख उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट नेताओं को आमंत्रित किया गया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
रिसेप्शन में शामिल होने वाले भारतीय सीईओ में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल, विप्रो के सीईओ श्रीनी पलिया, इंफोसिस के सीईओ सलिल एस. पारेख, बजाज फिनसर्व के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव बजाज, महिंद्रा समूह के ग्रुप सीईओ अनिश शाह और जुबिलेंट भारती समूह के संस्थापक एवं सह-चेयरमैन हरि एस. भारती शामिल हैं।
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इन भारतीय उद्योगपतियों की मौजूदगी ऐसे समय में अहम मानी जा रही है, जब कंपनियां और सरकारें आपूर्ति श्रृंखलाओं, तकनीकी साझेदारियों और निवेश प्रवाहों की दोबारा समीक्षा कर रही हैं। अमेरिका और भारत के बीच नए व्यापार ढांचे को लेकर चल रही बातचीत के बीच दावोस में भारत की मजबूत उपस्थिति को नीति-निर्माताओं और निवेशकों द्वारा बारीकी से देखा जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप की दावोस वापसी ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव तेज़ हैं। हाल के हफ्तों में अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है, वहीं ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की उनकी कोशिशों ने यूरोप में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। ट्रंप द्वारा कई यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने और सहयोगी देशों की आलोचना ने अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में तनाव और बढ़ा दिया है।
दावोस में अपने भाषण में ट्रंप से यह संदेश देने की उम्मीद है कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था अब एक नए, अधिक शक्ति-आधारित और लेन-देन केंद्रित दौर में प्रवेश कर रही है, जिसका सीधा असर बाज़ारों और कारोबारी रणनीतियों पर पड़ेगा।
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