जॉर्डन में अमेरिकी और उसके सहयोगी सैन्य बलों पर हुए ईरानी मिसाइल एवं ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि एक सैनिक अब भी लापता है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह घटना वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का एक और गंभीर चरण है।
सेंटकॉम के अनुसार, यह हमला 17 जुलाई को उस समय हुआ जब अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं ईरानी हमलों से अपने सैन्य ठिकानों की रक्षा कर रही थीं। हमले में घायल हुए चार अमेरिकी सैनिकों को इलाज के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई, जबकि मामूली रूप से घायल अन्य सैनिक फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं। अमेरिकी सेना ने मृत सैनिकों की पहचान उनके परिजनों को सूचना दिए जाने तक सार्वजनिक नहीं करने का फैसला किया है।
इस बीच, ईरान के हमलों से सबसे अधिक नुकसान कुवैत में दर्ज किया गया, जहां एक समुद्री जल शुद्धिकरण संयंत्र और एक तेल प्रतिष्ठान को क्षति पहुंची। इसकी पुष्टि कुवैती अधिकारियों और कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने की है।
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तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने लगभग एक महीने पहले हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को निलंबित करने का संकेत दिया। इसी दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी दी कि यदि उसने इस्लामी गणराज्य पर हमले जारी रखे तो उसे "ऐसा अविस्मरणीय सबक मिलेगा जिसे वह कभी नहीं भूलेगा।" उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर को भी "निरर्थक और अमान्य" बताया।
मोजतबा ख़ामेनेई ने यह भी कहा कि ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगी, जिन्हें "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" कहा जाता है, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब देंगे। इससे पूरे पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
उधर, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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