भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने सोमवार को दिल्ली में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर कथित पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि युवाओं के सवालों का जवाब लाठी और आंसू गैस के इस्तेमाल से नहीं दिया जा सकता।
केटीआर ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी चिंताओं और मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से करना चाहिए, न कि बल प्रयोग के जरिए।
बीआरएस नेता ने कहा कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा से जुड़े विवाद लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और उचित कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि छात्रों का विश्वास परीक्षा प्रणाली में बना रहे।
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दिल्ली में नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं और छात्र संगठनों को पुलिस द्वारा रोके जाने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किए जाने की खबरों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
केटीआर ने कहा कि सरकार को छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता समय की जरूरत है।
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कुछ समय से छात्र संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस मुद्दे को लेकर संसद के मानसून सत्र में भी राजनीतिक माहौल गरम है। विपक्षी दल सरकार पर परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
केटीआर ने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद स्थापित करे तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकाले।
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