मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को बड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि तंजावुर स्थित शण्मुगा आर्ट्स, साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च अकादमी (SASTRA) विश्वविद्यालय को 31.37 एकड़ सरकारी भूमि से बेदखल किया जाए। यह भूमि पिछले लगभग 40 वर्षों से विश्वविद्यालय के कब्जे में थी।
जस्टिस एस.एम. सुब्रमणियम और जस्टिस सी. कुमारप्पन की तीसरी खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि यह सरकारी जमीन है और इसे सार्वजनिक उद्देश्य, विशेष रूप से जेल की स्थापना के लिए आवश्यक बताया गया है। अदालत ने माना कि इतने लंबे समय तक किसी शैक्षणिक संस्था द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा बनाए रखना कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने तंजावुर के जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी करें। अदालत ने यह भी कहा कि यदि बेदखली के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो जिला प्रशासन पुलिस की सहायता भी ले सकता है।
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अदालत ने अपने आदेश में यह रेखांकित किया कि सरकारी संपत्ति का उपयोग केवल वैध और स्वीकृत उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए। किसी भी संस्था, चाहे वह शैक्षणिक ही क्यों न हो, को नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस फैसले को सरकारी भूमि संरक्षण और अतिक्रमण के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह निर्णय अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक संदेश है कि वे भूमि और संपत्ति से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करें।
राज्य सरकार को अब अदालत के आदेश के अनुसार तय समयसीमा में कार्रवाई करनी होगी, ताकि प्रस्तावित जेल परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा सके।
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