मौसम बदलते ही बुखार के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। अक्सर लोग हल्का बुखार, शरीर दर्द या सिरदर्द को सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और खुद ही दवा ले लेते हैं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार हर बुखार एक जैसा नहीं होता और समय पर सही पहचान न होने पर मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं।
विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों को जागरूक रहने की सलाह दी है। वरिष्ठ सलाहकार और फैमिली मेडिसिन विशेषज्ञ ने बताया कि मरीज अक्सर हर बुखार को वायरल समझ लेते हैं, जबकि मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों में समय पर इलाज जरूरी होता है।
मलेरिया:
मलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला परजीवी संक्रमण है। इसके लक्षण एक खास पैटर्न में आते हैं। मरीज को तेज ठंड लगती है, फिर तेज बुखार आता है और बाद में पसीना आने लगता है। यह चक्र हर 2–3 दिन में दोहराया जा सकता है। सिरदर्द, उल्टी और कमजोरी भी आम लक्षण हैं।
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डेंगू:
डेंगू भी मच्छरों से फैलता है लेकिन यह ज्यादा गंभीर हो सकता है। इसमें 104°F तक तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द, त्वचा पर चकत्ते और प्लेटलेट्स का तेजी से गिरना शामिल है। डॉक्टर ने चेतावनी दी कि पेट दर्द, खून आना या लगातार कमजोरी होने पर तुरंत इलाज जरूरी है।
वायरल फीवर:
वायरल बुखार आमतौर पर हल्का होता है और 3 से 5 दिनों में ठीक हो जाता है। इसमें हल्का बुखार, गले में खराश, खांसी-जुकाम और शरीर दर्द जैसे लक्षण होते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि केवल लक्षण देखकर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। रक्त जांच ही सही तरीका है यह जानने के लिए कि बुखार मलेरिया, डेंगू या वायरल है।
विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी कि घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
यदि बुखार 2–3 दिन से अधिक रहे या लक्षण गंभीर हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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