बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने केंद्र और अधिकांश राज्य सरकारों पर आरोप लगाया है कि वे जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय जाति और धर्म की आड़ में अपने राजनीतिक हितों को बढ़ावा दे रही हैं। शनिवार को लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक शुरू होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने यह बयान दिया।
मायावती ने कहा कि पिछले कुछ समय से सरकारें जनता से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर रही हैं और राजनीतिक लाभ के लिए समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने मौजूदा संसद सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा होने के बजाय सत्तापक्ष और विपक्ष एक-दूसरे को नीचा दिखाने और “सस्ती राजनीति” करने में लगे हुए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों को संविधान की गरिमा और संसद की मर्यादा का सम्मान करना चाहिए और संसदीय नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सामने कई अहम राष्ट्रीय मुद्दे हैं, जिन पर संसद में स्पष्टता और चर्चा जरूरी है, लेकिन आपसी टकराव के कारण ये मुद्दे पीछे छूट गए हैं और पूरा देश इसे देख रहा है।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है, इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश देने के लिए यह “महत्वपूर्ण” राज्य स्तरीय बैठक बुलाई गई है। उन्होंने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के कारण पार्टी का काफी काम प्रभावित हुआ है।
मायावती ने कहा कि अब इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और विपक्षी दलों की नई रणनीतियों तथा साजिशों से सावधान रहने की सलाह दी, ताकि बसपा को कमजोर करने के प्रयासों का मुकाबला किया जा सके।
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