असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर प्रस्तावित भूमिगत रेलवे सुरंग का स्वागत करते हुए इसे एक “गेम-चेंजर” पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत और देश के बाकी हिस्सों के बीच संपर्क को और सुदृढ़ करेगी तथा यात्रियों और माल की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगी।
मुख्यमंत्री सरमा ने अपने संदेश में कहा कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूर्वोत्तर के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगी। उन्होंने उल्लेख किया कि लंबे समय से पूर्वोत्तर क्षेत्र सतही संपर्क के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भर रहा है, जिसे आमतौर पर “चिकन नेक” कहा जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दूरदर्शी प्रस्ताव राष्ट्रीय एकता और संतुलित क्षेत्रीय विकास के प्रति केंद्र सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह सुरंग यात्रियों और वस्तुओं की आवाजाही के लिए एक सुरक्षित और निर्बाध मार्ग प्रदान करेगी।
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मुख्यमंत्री ने कई अवसरों पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक संवेदनशीलता को रेखांकित किया है। उन्होंने इसे न केवल एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक लाइफलाइन बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी संवेदनशील क्षेत्र बताया है। उनका कहना है कि किसी एक सतही मार्ग पर निर्भरता प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं या अन्य बाधाओं के समय पूर्वोत्तर को शेष भारत से प्रभावी रूप से काट सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित भूमिगत रेलवे सुरंग इन जोखिमों को काफी हद तक कम करेगी और हर मौसम में सुरक्षित संपर्क प्रदान करेगी। इस परियोजना से व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल केंद्र सरकार की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘विकसित भारत’ दृष्टि के अनुरूप है, जिससे पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
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