संसद की स्थायी समिति ने देश के खाद्य तेल (एडिबल ऑयल) क्षेत्र की विस्तृत समीक्षा की है और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम करने पर जोर दिया है। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया और देश में खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने तथा आयात पर निर्भरता कम करने को लेकर अपनी योजनाओं की जानकारी दी।
समिति की अध्यक्ष कनिमोझी ने इस चर्चा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार और संबंधित विभागों से यह पूछा गया है कि वे देश को खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं और किसानों को किस तरह समर्थन दिया जा रहा है।
कनिमोझी ने कहा, “यह बहुत महत्वपूर्ण चर्चा थी। हमने संबंधित विभागों से पूछा कि वे क्या योजना बना रहे हैं ताकि हम आत्मनिर्भर बन सकें और किसानों को कैसे सहयोग दिया जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार और उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति की आवश्यकता है।
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बैठक में यह भी चर्चा हुई कि देश में खाद्य तेल की खपत के मुकाबले घरेलू उत्पादन कम है, जिसके कारण बड़ी मात्रा में आयात करना पड़ता है। समिति ने सुझाव दिया कि तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने, किसानों को बेहतर मूल्य देने और आधुनिक तकनीक अपनाने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनता है, तो इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
समिति ने संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करें जिससे देश धीरे-धीरे खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल कर सके।
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