पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने अपनी सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा योजना मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के करीब 65 लाख परिवारों को हर साल 10 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देना है। सरकार इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक “क्रांतिकारी कदम” बता रही है, लेकिन गंभीर वित्तीय दबाव के चलते इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्ष 2025-26 में पंजाब पर करीब 4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके बावजूद सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए केवल 1,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि योजना के दायरे और लाभार्थियों की संख्या को देखते हुए अपर्याप्त मानी जा रही है। इससे पहले की स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत भी अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बकाया भुगतान को लेकर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और आप सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को मोहाली में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस योजना की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने पूर्ववर्ती राज्य सरकारों पर स्वास्थ्य क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप भी लगाया।
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हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्याप्त फंडिंग और समय पर भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो यह योजना सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक संकट का कारण बन सकती है। राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति, पहले से लंबित बकाया और अस्पतालों की भागीदारी जैसे मुद्दे इस योजना की सफलता में बड़ी बाधा बन सकते हैं।
इस बीच विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाया है कि भारी कर्ज में डूबे राज्य में इतनी बड़ी योजना को कैसे टिकाऊ बनाया जाएगा। आने वाले महीनों में यह साफ हो सकेगा कि यह योजना वाकई स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाएगी या फिर आप सरकार के लिए एक नई चुनौती साबित होगी।
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