शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो लोग आतंकवादियों को वित्तीय सहायता देते हैं, उनका समर्थन करते हैं अथवा उन्हें सुरक्षित पनाह देते हैं, उनके लिए दुनिया में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल सतही कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समूल नष्ट करना आवश्यक है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक में सदस्य देशों से आतंकवाद के मुद्दे पर एकजुट होकर कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए खतरा है और इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उनका यह बयान उस समय आया जब शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे।
सुरक्षा के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्थिक सहयोग के पहलू पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने घोषणा की कि भारत शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना को अपना समर्थन देता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिए सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी को भी मजबूत करना आवश्यक है।
और पढ़ें: पेरियार विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पर डीएमके कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कार्रवाई की मांग
शंघाई सहयोग संगठन, जिसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान सहित मध्य एशिया के कई देश शामिल हैं, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख बहुपक्षीय मंच है। इस संगठन की बैठकों में सदस्य देश आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाते रहे हैं।
भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंता व्यक्त करता रहा है और इस दिशा में कड़े कदम उठाने की वकालत करता रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान भारत की इसी नीति की निरंतरता को दर्शाता है, जिसमें आतंकवाद के विरुद्ध शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाने पर जोर दिया जाता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस वक्तव्य को भारत के कूटनीतिक रुख के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वे अंतरराष्ट्रीय मंच का उपयोग कर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, व्यापार और आर्थिक सहयोग को लेकर भारत की सकारात्मक भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय विकास और स्थिरता दोनों को समान महत्व देता है।
और पढ़ें: भूपेंद्र यादव जैव विविधता पर भारत की उपलब्धियां प्रस्तुत करने आर्मेनिया पहुंचे