तेलंगाना में 2028 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बीच तीखी बयानबाजी ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।
विवाद की शुरुआत नितिन नवीन के तीन दिवसीय तेलंगाना दौरे के दौरान हुई। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले 35 प्रतिशत वोट शेयर ने राज्य में पार्टी की स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की तरह संगठन को मजबूत कर भाजपा तेलंगाना में भी सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उसने तेलंगाना को दिल्ली के नेताओं के लिए "निजी एटीएम" बना दिया है।
नितिन नवीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए उन्हें "पार्ट-टाइम राजनेता" बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता पूर्णकालिक रूप से जनता की सेवा करता है, जबकि कांग्रेस सरकार सत्ता में आने के बाद से केवल अपने परिवार और पार्टी के हितों की चिंता कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से ही भाजपा के सत्ता में आने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इन दावों पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह यह भी नहीं जानते कि नितिन नवीन कौन हैं। उन्होंने भाजपा के दावों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य के कांग्रेस कार्यकर्ता किसी भी राजनीतिक चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।
रेवंत रेड्डी की इस टिप्पणी पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति और अहंकार को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि रेवंत रेड्डी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को नहीं जानते, तो उन्हें भारतीय राजनीति का छात्र कहलाने का भी अधिकार नहीं है।
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