भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को फॉर्म-6 और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। पात्रा ने कहा कि फॉर्म-6 को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है और बिहार में SIR का फैसला निर्वाचन आयोग ने सर्वसम्मति से लिया था। निर्वाचन आयोग ने भी 5 अक्टूबर को राहुल गांधी के दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि बिहार में SIR का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था।
पात्रा ने फॉर्म-6 के मुद्दे पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस फॉर्म को अवैध घोषित नहीं किया है। उनके मुताबिक, अदालत ने केवल उस याचिका पर विचार करने की बात कही है, जिसमें फॉर्म में किए गए कथित बदलाव को चुनौती दी गई है।
यह विवाद तब बढ़ा जब राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में कथित तौर पर गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किया। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में किए गए किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है और रिकॉर्ड देखकर यह जांचेगा कि बदलाव किसके निर्देश पर किए गए।
और पढ़ें: राहुल गांधी चुप क्यों हैं? कर्नाटक कथित पेपर लीक मामले पर बीजेपी के संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला
वहीं, निर्वाचन आयोग का कहना है कि मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के दौरान फॉर्म के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। आयोग ने यह भी कहा कि बिहार में SIR का आदेश सर्वसम्मति से पारित हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में SIR व्यवस्था को बरकरार रखा था।
आयोग ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि SIR से जुड़े फॉर्म-6 के साथ लगाए गए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया था। हालांकि, अदालत ने अब स्पष्ट किया है कि उसने फॉर्म-6 में किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी थी और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
और पढ़ें: संविधान को कमजोर करने की साजिश: भाजपा ने चुनाव आयोग पर विपक्ष के हमलों की आलोचना की