भारत में आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम को तेज गति मिली है। सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 10 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसी के साथ देश के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र ने भी मजबूत वृद्धि दर्ज की है और वर्ष 2024-25 में इसका कुल राजस्व अनुमानित रूप से 283 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर विकास की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के विजन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन, असेंबली, परीक्षण, पैकेजिंग और मॉड्यूल निर्माण तक एक संपूर्ण वैल्यू चेन स्थापित करना है।
सेमीकंडक्टर के रणनीतिक महत्व को देखते हुए सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत दो फैब्रिकेशन यूनिट और आठ पैकेजिंग व असेंबली सुविधाओं सहित कुल 10 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें सीएमओएस सिलिकॉन फैब, सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एडवांस्ड और मेमोरी पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। इनमें से चार इकाइयों में पायलट उत्पादन भी शुरू हो चुका है।
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कार्यक्रम के अंतर्गत चिप डिजाइन और प्रतिभा विकास को भी बढ़ावा दिया गया है। स्टार्टअप्स के माध्यम से 24 चिप डिजाइन परियोजनाओं को समर्थन मिला है, जिनमें से 16 ने टेप-आउट पूरा कर लिया है और 13 को वेंचर कैपिटल फंडिंग प्राप्त हुई है। इसके अलावा 350 विश्वविद्यालयों को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स की सुविधा दी गई है, जिससे लगभग 65,000 इंजीनियर लाभान्वित हो रहे हैं।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन को नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है, जो परियोजनाओं के मूल्यांकन और सिफारिश का कार्य कर रही है। स्वीकृत परियोजनाओं में माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा गुजरात में 22,516 करोड़ रुपये का असेंबली और टेस्ट संयंत्र तथा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा ताइवान की पीएसएमसी के साथ मिलकर 91,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली सेमीकंडक्टर फैब परियोजना शामिल है। इसके अलावा असम, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश और बिहार में भी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
इस बीच, भारत का आईटी क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्ष 2020-21 में 196 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में इसका राजस्व 283 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे रोजगार और समावेशी विकास को बल मिला है।
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