दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को जनता को आश्वस्त किया कि गुमशुदा या अपहृत बच्चों के मामलों में घबराने की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि अब तक किसी संगठित गिरोह या अपराधी नेटवर्क का इस प्रकार के मामलों में कोई पता नहीं चला है।
जनवरी के पहले पंद्रह दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में 800 से अधिक लोग गुम हुए थे, लेकिन पुलिस ने कहा कि यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में वास्तव में गिरावट को दर्शाता है। आधिकारिक डेटा के अनुसार, 1 से 15 जनवरी 2026 के बीच कुल 807 लोग गुम हुए, जिनमें रोजाना औसतन 54 लोग शामिल थे। इनमें 509 महिलाएं और लड़कियां, जबकि 298 पुरुष थे। कुल गुमशुदा में 191 नाबालिग और 616 वयस्क थे।
पुलिस ने कहा कि जनवरी 2026 में गुमशुदा व्यक्तियों की रिपोर्टों में पिछले सालों की तुलना में कमी देखी गई। पुलिस सभी शिकायतों को तुरंत दर्ज करती है और जांच करती है। गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट न केवल स्थानीय थाने में, बल्कि ऑनलाइन और इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (112) के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है।
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सभी मामलों में मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs) का पालन किया जाता है और बच्चों के मामले सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संभाले जाते हैं। प्रत्येक जिले में समर्पित गुमशुदा व्यक्ति स्क्वॉड तैनात हैं और क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट तेजी से जांच और बचाव कार्य में लगी हुई है।
पुलिस ने जनता से अपील की कि वे सतर्क लेकिन शांत रहें और सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफार्मों पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से कहा कि गुमशुदा व्यक्ति की सूचना तुरंत रिपोर्ट करें और जांच में मदद के लिए सटीक जानकारी साझा करें।
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