जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उन्हें सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी है। याचिका में कहा गया है कि परिवार का सरकारी अस्पताल में चल रहे इलाज पर भरोसा नहीं रह गया है और वांगचुक को स्वतंत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
यह याचिका उस समय दायर की गई है जब दिल्ली पुलिस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रशासन परिवार को वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहा है। परिवार का कहना है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद उन्हें किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच संभव नहीं हो पा रही है।
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गीतांजलि आंगमो ने अपनी याचिका में वांगचुक की पोटैशियम जांच रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, अस्पताल ने पहले पोटैशियम स्तर 2.9 बताया था, जबकि उसी रक्त नमूने की स्वतंत्र जांच में यह 3.6 पाया गया। वहीं 17 जुलाई को हुई एक अन्य जांच में पोटैशियम स्तर 4.3 दर्ज किया गया था। परिवार का आरोप है कि रक्त का नमूना लगभग साढ़े दस घंटे की देरी से सौंपा गया, जिससे जांच प्रक्रिया पर संदेह पैदा हुआ है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि वांगचुक को परिवार की पसंद के निजी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी जाए। साथ ही उनके निजी चिकित्सकों और कानूनी सलाहकारों को बिना किसी रोक-टोक के मिलने की इजाजत देने की भी मांग की गई है।
गीतांजलि आंगमो ने आरोप लगाया कि अस्पताल में वांगचुक के वार्ड के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं और उनकी अस्पताल में मौजूदगी "चिकित्सा देखभाल नहीं, बल्कि अवैध हिरासत" जैसी प्रतीत होती है।
उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक 28 जून से नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और इससे जुड़े छात्र मौतों के विरोध में सीजेपी के नेतृत्व वाले आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
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