पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में दोबारा शामिल होने की संभावना के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पंजाब की बेहतरी के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन करने को तैयार है।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात के बाद शुक्रवार को बादल ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस को राज्य में अपना मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बताया। हालांकि, उन्होंने बीजेपी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को अकाली दल और बीजेपी के बीच फिर से गठबंधन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
बीजेपी-अकाली दल गठबंधन की चर्चा तेज
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल की एनडीए में वापसी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। इससे पहले अगस्त में सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उस बैठक में पंजाब की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई थी। इसके बाद दोनों दलों के दोबारा साथ आने की अटकलें और तेज हो गई थीं।
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बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक सहयोगी रहे थे। हालांकि, सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर मतभेद बढ़ने के बाद दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था। केंद्र सरकार ने किसानों के व्यापक आंदोलन के बाद इन कानूनों को वापस ले लिया था, लेकिन अकाली दल एनडीए में दोबारा शामिल नहीं हुआ।
पिछले चुनावों में दोनों दलों का प्रदर्शन कमजोर
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी और अकाली दल ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। बीजेपी को केवल दो सीटें मिली थीं, जबकि अकाली दल तीन सीटों पर सिमट गया था। यह अकाली दल का अब तक का सबसे खराब विधानसभा चुनावी प्रदर्शन था।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी दोनों दलों के साथ आने की चर्चा हुई थी, लेकिन गठबंधन नहीं हो सका। अकाली दल ने बठिंडा की एक सीट जीती, जबकि बीजेपी पंजाब में एक भी लोकसभा सीट हासिल नहीं कर पाई।
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी अवधि में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में अकाली दल और बीजेपी के बीच संभावित गठबंधन राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
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