केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत देशभर में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। योजना के अंतर्गत अब तक 3.30 लाख गांवों की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही ग्रामीण नागरिकों को जारी किए गए प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर बैंकों से ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, प्रॉपर्टी कार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन कार्डों के आधार पर अब तक 11,147 ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनके माध्यम से कुल 1,713 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।
स्वामित्व योजना का उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को उनकी आवासीय संपत्तियों का कानूनी अधिकार उपलब्ध कराना है। इसके तहत ड्रोन तकनीक की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वेक्षण और नक्शा तैयार किया जाता है। इसके बाद संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाते हैं।
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मंत्रालय ने बताया कि योजना के तहत जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों को कम करने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जमीनी सत्यापन और विवाद समाधान की व्यवस्था के माध्यम से स्वामित्व रिकॉर्ड को निष्पक्ष और सटीक तरीके से अंतिम रूप दिया जाता है।
प्रॉपर्टी कार्ड मिलने से ग्रामीण नागरिकों को अपनी संपत्ति का प्रमाण मिलता है, जिससे वे बैंक ऋण लेने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में सक्षम हो रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि स्वामित्व योजना केवल संपत्ति रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का माध्यम भी बन रही है।
योजना के माध्यम से गांवों में संपत्ति अधिकारों की स्पष्टता बढ़ने के साथ-साथ विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में भी सहायता मिल रही है। केंद्र सरकार लगातार इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक गांवों को इसके दायरे में लाने का प्रयास कर रही है।
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