तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। हालांकि पार्टी ने इस प्रस्ताव के उद्देश्य से सहमति जताई है, लेकिन टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में संयम और संतुलित रणनीति अपनाने की बात कही है।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि स्पीकर को हटाने जैसे कदम को तुरंत उठाने के बजाय एक “रचनात्मक और चरणबद्ध” दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस कदम को “अंतिम विकल्प” बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखते हुए सभी संभावित रास्तों को पहले आजमाना जरूरी है।
टीएमसी ने यह स्पष्ट किया कि वह विपक्ष के साथ व्यापक मुद्दों पर सहयोग करने के पक्ष में है, लेकिन हर मुद्दे पर तुरंत कठोर कदम उठाने से बचना चाहिए। पार्टी का मानना है कि संसद के कामकाज और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए संवाद और संतुलित रणनीति अधिक प्रभावी हो सकती है।
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हालांकि स्पीकर के मामले में टीएमसी ने सावधानी बरतने की बात कही, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के मामले में पार्टी का रुख अलग है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी विकल्प पहले ही आजमाए जा चुके हैं और अब महाभियोग प्रस्ताव ही एकमात्र रास्ता बचा है।
टीएमसी का यह रुख विपक्ष के भीतर रणनीतिक मतभेद को दर्शाता है। जहां कुछ दल स्पीकर को हटाने के लिए तुरंत कदम उठाने के पक्ष में हैं, वहीं टीएमसी का मानना है कि ऐसा कदम अंतिम विकल्प होना चाहिए। इस बयान से संसद की राजनीति में चल रही रणनीतिक बहस और विपक्षी दलों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण साफ नजर आते हैं।
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