जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए घातक हमले के बाद अमेरिका ने रविवार को ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू कर दिए। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को "तेजी से दंडित करना" और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों तथा तेल टैंकरों के लिए खतरा पैदा करने की उसकी क्षमता को कमजोर करना है।
सेंटकॉम ने कहा कि ये हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर किए गए। अमेरिकी सेना के अनुसार, जॉर्डन में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, एक सैनिक अब भी लापता है, जबकि चार अन्य घायल सैनिकों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उन्हें उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
सेंटकॉम ने बताया कि हमले के समय अमेरिकी और उसके सहयोगी देश अपने सैन्य ठिकानों की रक्षा कर रहे थे। हालांकि, मारे गए सैनिकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है और हमले के बारे में अधिक जानकारी भी साझा नहीं की गई।
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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 430 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य टकराव लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है।
इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने इस्लामी गणराज्य पर हमले जारी रखे तो उसे "ऐसा सबक मिलेगा जिसे वह कभी नहीं भूलेगा।" सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित संदेश में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर को "निरर्थक और अमान्य" भी बताया।
उधर, ईरान के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने घोषणा की कि तेहरान लगभग एक महीने पहले हुए अंतरिम शांति समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को निलंबित कर रहा है। माना जा रहा है कि इस फैसले से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
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