भारत में सड़क सुरक्षा को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार व्हीकल-टू-व्हीकल (वी2वी) संचार प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का मसौदा जारी किया है, जिसके तहत वर्ष 2028 से नई गाड़ियों में वी2वी तकनीक अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस तकनीक की मदद से वाहन एक-दूसरे से वास्तविक समय में जानकारी साझा करेंगे, जिससे संभावित दुर्घटनाओं और सड़क पर मौजूद खतरों की पहले ही चेतावनी मिल सकेगी।
वी2वी प्रणाली के माध्यम से वाहन अपनी गति, स्थिति, दिशा, त्वरण और अचानक ब्रेक लगाने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां आसपास के वाहनों तक तुरंत पहुंचाएंगे। उदाहरण के तौर पर यदि हाईवे पर आगे चल रही कोई कार अचानक ब्रेक लगाती है और बीच में कोई बड़ा ट्रक होने के कारण पीछे आने वाला चालक उसे नहीं देख पाता, तब भी वी2वी प्रणाली उसके वाहन को पहले ही खतरे का संकेत दे देगी।
यह तकनीक अचानक ब्रेक लगने, आगे टक्कर की आशंका, असुरक्षित लेन परिवर्तन, गलत दिशा में आ रहे वाहन तथा एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों के आने की चेतावनी देने में सक्षम होगी। प्रस्तावित एआईएस-230 मानक के तहत इमरजेंसी ब्रेक अलर्ट, फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग, रॉन्ग-वे ड्राइविंग अलर्ट और इमरजेंसी व्हीकल अलर्ट जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं।
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सरकार ने इसे दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव दिया है। 1 अक्टूबर 2027 से यदि एल, एम और एन श्रेणी के नए वाहनों में वी2वी प्रणाली लगाई जाती है तो उन्हें एआईएस-230 मानक का पालन करना होगा, हालांकि उस समय इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से इन श्रेणियों के सभी नए दोपहिया, तिपहिया, यात्री और मालवाहक वाहनों में वी2वी प्रणाली अनिवार्य होगी।
यह प्रणाली मौजूदा कैमरा, रडार और सेंसर आधारित सुरक्षा प्रणालियों से अधिक उन्नत मानी जा रही है, क्योंकि यह ऐसे खतरों की जानकारी भी दे सकती है जो चालक या वाहन के सेंसर की सीधी दृष्टि में नहीं होते। सरकार का मानना है कि यह तकनीक एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा दुर्घटनाओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रस्तावित मानक के अनुसार वी2वी प्रणाली सेल्युलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग (सी-वी2एक्स) तकनीक पर आधारित होगी और 5.875 से 5.925 गीगाहर्ट्ज़ फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करेगी। फिलहाल यह अधिसूचना मसौदा चरण में है और सरकार ने आम जनता, वाहन निर्माताओं तथा अन्य संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।
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