उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार, 20 जुलाई को बाराबंकी जिले में स्थित प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेव मंदिर कॉरिडोर परियोजना की आधारशिला रखेंगे। राज्य सरकार का लक्ष्य इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूरा कर इसका उद्घाटन करना है।
लोधेश्वर महादेव मंदिर को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। माना जा रहा है कि इस परियोजना के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) क्षेत्र में अपनी धार्मिक और विकास से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाना चाहती है।
इस मंदिर में केवल बाराबंकी ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों जैसे उन्नाव, बांदा, जालौन, कानपुर, हमीरपुर और कालपी से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। भगवान शिव को कई समुदायों के लोग अपना आराध्य मानते हैं। विशेष रूप से सावन महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर लोध, गुर्जर, तोमर और पाल समुदायों के श्रद्धालुओं के साथ-साथ कांवड़ यात्री भी बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचते हैं।
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प्रस्तावित कॉरिडोर करीब 20 बीघा जमीन में विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए मंदिर के आसपास स्थित 127 मकानों और दुकानों को हटाया गया है। प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की, जबकि वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों को मुआवजा दिया गया। इन संपत्तियों को खाली कराने के लिए करीब 48 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया।
कॉरिडोर निर्माण के लिए सरकार ने लगभग 200 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसमें मंदिर के चारों ओर परिक्रमा मार्ग, भव्य प्रवेश द्वार, श्रद्धालुओं के लिए विश्राम गृह, सामान रखने की व्यवस्था और शौचालय जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा पास स्थित अमृत सरोवर का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इस परियोजना से बाराबंकी और आसपास के जिलों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय व्यापार को नई गति मिलने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। अयोध्या में राम मंदिर और वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद यह राज्य की एक और बड़ी धार्मिक पर्यटन परियोजना मानी जा रही है।
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