उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश अलीगंज इलाके में एक भीषण आग लगने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 9 अन्य घायल हो गए। यह हादसा एक तीन मंजिला इमारत में हुआ, जहां एक एनीमेशन संस्थान संचालित किया जा रहा था। मृतकों में अधिकांश छात्र बताए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, आग उषा मेहता मार्ग स्थित इमारत में लगी। आग तेजी से फैलने के कारण दूसरी मंजिल पर कक्षाएं कर रहे कई छात्र अंदर फंस गए। दमकल विभाग ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और राहत-बचाव अभियान चलाया।
हादसे के बाद भवन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की कार्रवाई जांच के दायरे में आ गई है। दस्तावेजों के अनुसार, जिस इमारत में आग लगी, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में कथित अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, यह आदेश दो महीने से भी कम समय में वापस ले लिया गया था।
और पढ़ें: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव: अंतिम मतदाता सूची जारी, 40 लाख से अधिक नए मतदाता जुड़े
रिकॉर्ड बताते हैं कि अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से विजय कुमार, पुत्र रामेश्वर सहाय, को वर्ष 1980 में आवंटित किया गया था। बाद में यह संपत्ति वीरेंद्र प्रताप शुक्ल और सुरेंद्र प्रताप शुक्ल के नाम स्थानांतरित हुई। लगभग 1,992 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाली इस इमारत का नक्शा 20 अगस्त 2014 को स्व-प्रमाणन योजना के तहत केवल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।
इसके बावजूद भवन में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने लगीं। अवैध निर्माण की शिकायतों पर एलडीए ने मामला दर्ज कर 10 मई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था, लेकिन 5 जुलाई 2016 को यह आदेश वापस ले लिया गया।
अब इस भीषण अग्निकांड के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आवासीय अनुमति वाले भवन में व्यावसायिक संस्थान कैसे चल रहा था और ध्वस्तीकरण आदेश किन परिस्थितियों में निरस्त किया गया। जांच एजेंसियां अब इन सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
और पढ़ें: बिजली का अनावश्यक इस्तेमाल न करें, एसी 24 डिग्री पर चलाएं: यूपी बिजली विभाग की अपील