बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव 2010 में बनी फिल्म अता पता लापता से जुड़े एक लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले में आत्मसमर्पण करने के बाद तिहाड़ जेल में हैं। यह मामला फिल्म के लिए लिए गए 5 करोड़ रुपये के कर्ज, चेक बाउंस और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत हुई सजा से जुड़ा है। कई बार समय मिलने और देरी के बावजूद अदालत ने उनकी अंतिम याचिका खारिज करते हुए तुरंत आत्मसमर्पण का आदेश दिया।
दरअसल, राजपाल यादव ने 2010 में अपनी फिल्म के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई, जिसके बाद वे आर्थिक संकट में फंस गए और कर्ज चुकाने में असमर्थ रहे। कर्ज चुकाने के लिए जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद अभिनेता ने कई अपीलें कीं, लेकिन मामला वर्षों तक चलता रहा। इस दौरान बकाया राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, हालांकि 2025 में 75 लाख रुपये सहित कुछ भुगतान किए गए थे।
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लगातार देरी के बाद अदालत ने कहा कि मामले को सुलझाने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। 4 फरवरी 2026 को न्यायमूर्ति स्वरना कांता शर्मा ने और समय देने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी सार्वजनिक पहचान के कारण कोई अतिरिक्त राहत नहीं दी जा सकती। इसके बाद राजपाल यादव ने गुरुवार शाम करीब 4 बजे तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत में जमा राशि शिकायतकर्ता कंपनी को सौंप दी।
आत्मसमर्पण से पहले अभिनेता ने भावुक बयान देते हुए कहा कि उनके पास पैसे नहीं हैं और इस संकट से अकेले ही जूझना पड़ रहा है।