मुंबई में कंजेशन टैक्स लागू करने के बीजेपी के प्रस्ताव ने शहर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। दुनिया के कई बड़े शहरों—जैसे लंदन और स्टॉकहोम—में पहले से लागू यह व्यवस्था अब मुंबई में भी चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, कमजोर सार्वजनिक परिवहन और कानूनी अड़चनें इसके सामने बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं।
रविवार (8 फरवरी) को नवनिर्वाचित नगरसेवक मकरंद नरवेकर ने मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त भूषण गग्राणी को पत्र लिखकर शहर में कंजेशन टैक्स लागू करने पर विचार करने का आग्रह किया। इसके तुरंत बाद शिवसेना (यूबीटी) ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि यह कदम मुंबईकरों को “लूटने” की कोशिश है।
कंजेशन टैक्स वह शुल्क होता है जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में पीक ऑवर्स के दौरान प्रवेश करने वाले वाहनों से लिया जाता है। इसका उद्देश्य ट्रैफिक कम करना, प्रदूषण घटाना और शहर में बेहतर यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना होता है। मुंबई जैसे महानगर में, जहां ट्रैफिक जाम और प्रदूषण बड़ी समस्या है, यह प्रस्ताव कुछ विशेषज्ञों को व्यावहारिक लगता है।
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हालांकि, इस योजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। मुंबई की लोकल ट्रेनें और बसें पहले से ही भारी दबाव में हैं। ऐसे में यदि निजी वाहनों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाता है, तो सार्वजनिक परिवहन पर और अधिक बोझ पड़ सकता है। इसके अलावा, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी इस योजना को लागू करने में बाधा बन सकती हैं।
राजनीतिक रूप से यह मुद्दा तेजी से गरमाता जा रहा है। जहां बीजेपी इसे ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने का समाधान बता रही है, वहीं विपक्ष इसे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहा है। अब देखना होगा कि यह प्रस्ताव केवल राजनीतिक बहस बनकर रह जाता है या वास्तव में नीति के रूप में लागू हो पाता है।
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