वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में असली मुद्दा “रूप नहीं बल्कि मूल और उद्देश्य” का है।
दिल्ली में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिंघवी ने कहा कि एसआईआर को लेकर बहस कभी भी केवल इस बात पर नहीं रही कि चुनाव आयोग को पुनरीक्षण करने का अधिकार है या नहीं, बल्कि यह हमेशा इसकी मंशा और इसके लागू करने के तरीके पर केंद्रित रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता सूची का शुद्धिकरण आवश्यक है, लेकिन यह कार्य पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। यदि किसी प्रक्रिया में उद्देश्य को लेकर सवाल उठते हैं, तो उसे गंभीरता से देखना चाहिए।
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सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार ऐसे कदमों को लेकर राजनीतिक विवाद पैदा होते हैं, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निष्पक्षता के साथ निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एसआईआर जैसे कदम केवल तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध लोकतंत्र की बुनियाद से होता है, इसलिए इनकी जांच केवल अधिकार क्षेत्र के आधार पर नहीं बल्कि उनके प्रभाव के आधार पर भी होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि किसी भी सुधार प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को मजबूत करना होना चाहिए, न कि किसी विशेष वर्ग या समूह को प्रभावित करना।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज हो गई है, और विभिन्न दलों के बीच इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
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