गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग ने गिरनार वन्यजीव अभयारण्य में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा की है। यह निर्णय हाल ही में हुई उस दुखद घटना के बाद लिया गया, जिसमें खेड़ा जिले के 11 वर्षीय बालक मयूर चौहान की गिरनार क्षेत्र के पास शेर के हमले में मौत हो गई थी।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस घटना के बाद वन एवं पर्यावरण विभाग की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन्यजीव संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
सरकार ने निर्णय लिया है कि गिरनार वन्यजीव अभयारण्य में श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा वनकर्मियों की संख्या बढ़ाने, आधुनिक निगरानी प्रणाली का उपयोग करने तथा जोखिम वाले स्थानों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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श्रद्धालुओं को सुरक्षित मार्गों से ही यात्रा करने की सलाह दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की भी तैनाती की जाएगी। वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में यह भी कहा गया कि गिरनार आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण के नियमों का भी पूरी तरह पालन किया जाएगा ताकि प्राकृतिक आवास और वन्यजीवों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।
राज्य सरकार का मानना है कि इन नए सुरक्षा उपायों से भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम होगी और गिरनार आने वाले श्रद्धालु अधिक सुरक्षित वातावरण में अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकेंगे।
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