भारतीय मिर्च निर्यातकों के संगठन ने देश के मसाला क्षेत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर स्पाइसेस बोर्ड ऑफ इंडिया से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इन समस्याओं में विदेशों में खेपों की अस्वीकृति, चीन में पंजीकरण में देरी और चीनी अधिकारियों द्वारा तीन प्रमुख भारतीय निर्यात कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंध शामिल हैं।
निर्यातकों के संगठन ने स्पाइसेस बोर्ड के सचिव एम.एस. मणिवन्नन को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन आंध्र प्रदेश के पालनाड जिले के एडलापाडु स्थित स्पाइसेस पार्क के दौरे के दौरान सोमवार को दिया गया।
संगठन ने बताया कि भारतीय निर्यातकों को कई देशों में विभिन्न कारणों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चीन में कीटनाशक अवशेष (पेस्टिसाइड रेजिड्यू) के कारण खेपों को अस्वीकार किया जा रहा है। वहीं श्रीलंका में अफ्लाटॉक्सिन और नमी (मॉइस्चर) की समस्या के कारण निर्यात प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा थाईलैंड में कुछ कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया है।
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निर्यातकों के अनुसार, चीन द्वारा निलंबित की गई तीन भारतीय कंपनियां देश के सूखी मिर्च निर्यात का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा संभालती थीं। इन प्रतिबंधों का सीधा असर किसानों की आय, निर्यात मात्रा और भारत की एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में वैश्विक छवि पर पड़ रहा है।
संगठन ने कहा कि यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इससे न केवल व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि हजारों किसानों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा।
स्पाइसेस बोर्ड से आग्रह किया गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद बढ़ाए और निर्यातकों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे, ताकि भारतीय मसाला उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और विश्वसनीयता बनी रहे।
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