ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच तेहरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर देश में राजनीतिक अस्थिरता फैलाने और हिंसा भड़काने का गंभीर आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर कहा है कि ट्रंप की बयानबाज़ी ईरान के आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है।
यह पत्र ऐसे समय भेजा गया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान को लेकर उनका “अंतिम लक्ष्य जीत हासिल करना” है। इससे पहले ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों से “विरोध जारी रखने” और “संस्थानों पर कब्ज़ा करने” की अपील की थी और कहा था कि “मदद रास्ते में है।”
ईरान के राजदूत इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद और सभी सदस्य देशों से ट्रंप की बढ़ती आक्रामक बयानबाज़ी पर प्रतिक्रिया देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत महासचिव और सुरक्षा परिषद की विशेष जिम्मेदारी है कि वे हिंसा भड़काने, बल प्रयोग की धमकियों और अमेरिका द्वारा ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की स्पष्ट निंदा करें।
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इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र से यह भी आग्रह किया कि वह अमेरिका और इज़राइल से अस्थिरता फैलाने वाली नीतियों को तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह पालन करने को कहे। साथ ही उन्होंने अमेरिका को किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देने की मांग की। उन्होंने सभी देशों से “उकसावे वाले और गैर-जिम्मेदाराना बयान या कदम” उठाने से बचने की अपील भी की।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान में मौतों के आंकड़े भरोसेमंद नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि व्हाइट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक के बाद बेहतर जानकारी मिल सकेगी। ट्रंप ने संकेत दिया कि मौतों की संख्या सैकड़ों से लेकर हजारों तक हो सकती है।
ईरान के संयुक्त राष्ट्र दूत ने ट्रंप की बयानबाज़ी को “व्यापक सत्ता परिवर्तन नीति” का हिस्सा बताते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का सोशल मीडिया पोस्ट ईरान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने जून 2025 में हुए 12 दिवसीय युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका और इज़राइल निर्दोष नागरिकों, विशेषकर युवाओं की मौत के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं।
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