ईरान और अमेरिका के बीच हालिया तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ईरान के कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने पुष्टि की है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच शांति समझौते को लेकर एक प्रारंभिक सहमति बन गई है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से पहले अमेरिका को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें पूरी करनी होंगी।
यह घोषणा उस समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ शांति समझौता पूरा हो चुका है और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी। इसके जवाब में ईरान ने कहा कि व्यापक और अंतिम समझौते पर आगे की बातचीत तभी होगी जब अमेरिका प्रारंभिक समझौते में किए गए वादों को पूरा करेगा।
ईरान के अनुसार, समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर शुक्रवार (19 जून 2026) को किए जाएंगे। हस्ताक्षर के बाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पूरा पाठ सार्वजनिक किया जाएगा।
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काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि ईरान अपनी प्रमुख मांगों और नीतिगत रुख को समझौते के मसौदे में शामिल कराने में सफल रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह उपलब्धि केवल कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम नहीं बल्कि ईरान की सैन्य क्षमता और प्रतिरोध का भी नतीजा है। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान ईरान ने महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं और विरोधी पक्ष अपने उद्देश्यों में विफल रहा।
ईरान ने अंतिम समझौते से पहले अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। इनमें सैन्य तनाव समाप्त करना, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हटाना और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करना शामिल है। तेहरान ने कहा है कि प्रस्तावित 60 दिनों की व्यापक वार्ता प्रक्रिया में शामिल होने से पहले वह इन प्रतिबद्धताओं के पालन की समीक्षा करेगा।
ग़रीबाबादी ने यह भी कहा कि समझौता ज्ञापन का अर्थ अमेरिका पर पूर्ण विश्वास करना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अमेरिकी कदमों की लगातार निगरानी करेगा और केवल वास्तविक कार्रवाई के आधार पर आगे की वार्ता का निर्णय लिया जाएगा।
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