केंद्र सरकार ने दर्द और बुखार में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवा नाइमेसुलाइड (Nimesulide) की 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा वाली सभी मौखिक “इमीडिएट रिलीज” तैयारियों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का कहना है कि यह दवा अधिक मात्रा में मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती है और इसके सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि 100 मिलीग्राम से अधिक नाइमेसुलाइड वाली मौखिक इमीडिएट रिलीज दवाओं का उपयोग मानव जीवन के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए जनहित में इन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाना आवश्यक और उचित है। अधिसूचना में स्पष्ट रूप से “100 मिलीग्राम से अधिक नाइमेसुलाइड वाली सभी मौखिक इमीडिएट रिलीज दवाओं” को प्रतिबंधित किया गया है।
इसी के साथ मंत्रालय ने कफ सिरप को ओवर-द-काउंटर (बिना डॉक्टर की पर्ची के) मिलने वाली दवाओं की सूची से हटाने का मसौदा नोटिफिकेशन भी जारी किया है। इसके तहत ‘खांसी के लिए सिरप’ को शेड्यूल-के से हटाया जाएगा, जो उन दवाओं की सूची है जिन्हें पंजीकृत चिकित्सक की पर्ची के बिना बेचा जा सकता है। हालांकि, खांसी के लिए इस्तेमाल होने वाली लोजेंज, गोलियां और टैबलेट अभी भी इस सूची में बनी रहेंगी।
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यह कदम मध्य प्रदेश में दूषित कफ सिरप के सेवन से कम से कम 22 बच्चों की मौत के बाद उठाया गया है। राजस्थान सहित अन्य राज्यों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां बच्चों को गलत या अनुपयुक्त कफ सिरप दिए जाने से मौत हुई।
इससे पहले, ड्रग रेगुलेटर के तहत गठित एक विशेषज्ञ समिति ने हाल की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए सुझाव दिया था कि खांसी के सिरप को दी गई ओवर-द-काउंटर छूट समाप्त की जानी चाहिए। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भी सिफारिश की है कि नाइमेसुलाइड का उपयोग गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं, गर्भधारण की योजना बना रहीं महिलाओं तथा किडनी या लीवर रोगियों में नहीं किया जाना चाहिए।
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