दिल्ली में सर्दियों से पहले बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 30 सितंबर को पटाखों के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि वह न तो पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है और न ही पूरे दिन इनके इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने कहा कि दोनों स्थितियों के बीच संतुलित रास्ता तलाशना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखे चलाने के लिए निश्चित समय तय किया जा सकता है और यह भी निर्धारित किया जाना चाहिए कि किस प्रकार के पटाखों की अनुमति होगी। अदालत के अनुसार, पूर्ण प्रतिबंध से कुछ लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जबकि पूरे दिन पटाखे चलाने की अनुमति बुजुर्गों, बीमार लोगों, बच्चों और अन्य जीवित प्राणियों पर प्रदूषण का गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और केंद्र सरकार को पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल तथा उनसे होने वाले ध्वनि प्रदूषण के स्तर की संयुक्त जांच करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
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दिल्ली में शीतकालीन प्रदूषण से निपटने की तैयारी
दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। 1 अक्टूबर से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) की जांच अभियान तेज किया जाएगा। बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को ईंधन नहीं देने की व्यवस्था लागू की जा रही है।
1 नवंबर से दिल्ली के बाहर पंजीकृत और बीएस-6 मानकों को पूरा नहीं करने वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक का प्रावधान है। निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर भी चरणबद्ध प्रतिबंध लगाए जाएंगे। 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण-ध्वस्तीकरण पर पूर्ण रोक रहेगी।
इसके अलावा 1 नवंबर से सरकारी और निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति रखने का प्रावधान है। एमसीडी कार्यालय सुबह 8:30 से शाम 5 बजे और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे। पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम भी योजना में शामिल हैं।
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