अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि तकनीकी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट इस सप्ताह “बड़े बदलाव” करने जा रहा है, ताकि डेटा सेंटरों की अत्यधिक बिजली खपत के कारण अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगे बिजली बिलों का सामना न करना पड़े। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर न केवल माइक्रोसॉफ्ट, बल्कि अन्य प्रमुख टेक कंपनियों के साथ भी मिलकर काम कर रही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे कभी नहीं चाहते कि अमेरिका के आम नागरिकों को डेटा सेंटरों के कारण बढ़ी हुई बिजली दरों का बोझ उठाना पड़े। बढ़ते डिजिटल युग में क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े डेटा के इस्तेमाल से डेटा सेंटरों की संख्या और उनकी ऊर्जा खपत लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से कई इलाकों में बिजली की मांग बढ़ी है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं के बिजली बिलों पर पड़ रहा है।
अपने बयान में ट्रंप ने कहा, “मैं कभी नहीं चाहता कि अमेरिकी नागरिकों को डेटा सेंटरों की वजह से ज्यादा बिजली का बिल देना पड़े। इसलिए मेरा प्रशासन प्रमुख अमेरिकी टेक कंपनियों के साथ मिलकर अमेरिकी जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सुनिश्चित कर रहा है। आने वाले हफ्तों में इस संबंध में कई अहम घोषणाएं की जाएंगी।”
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हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि माइक्रोसॉफ्ट किन तकनीकी या नीतिगत बदलावों की घोषणा करेगा, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल और बिजली खपत को सीमित करने से जुड़े कदम शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डेटा सेंटरों की ऊर्जा जरूरतों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में बिजली ढांचे पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन का यह कदम आम उपभोक्ताओं को राहत देने और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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