अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर बार-बार दिए जा रहे विवादित बयानों के बीच, अमेरिकी कांग्रेस का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन का दौरा करने जा रहा है। इस यात्रा का उद्देश्य अमेरिका और डेनमार्क के बीच एकजुटता का संदेश देना है, क्योंकि ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी देते रहे हैं।
यह प्रतिनिधिमंडल सीनेटर क्रिस कून्स के नेतृत्व में जाएगा, जिसमें कम से कम नौ सांसद शामिल होंगे। इनमें नॉर्थ कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस भी शामिल हैं। एक संसदीय सहयोगी के अनुसार, यह दल शुक्रवार (9 जनवरी 2026) और शनिवार (10 जनवरी 2026) को कोपेनहेगन में रहेगा। इस दौरान अमेरिकी सांसद डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं से मुलाकात करेंगे।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह ग्रीनलैंड में अपने हित साधने के लिए अन्य देशों को “बहाना” न बनाए। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में उसकी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड “हासिल करना” चाहिए, ताकि रूस या चीन वहां प्रभाव न बढ़ा सकें। हाल के दिनों में वाशिंगटन, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच तनाव और बढ़ गया है, क्योंकि व्हाइट हाउस इस मुद्दे पर सैन्य विकल्पों सहित कई संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा किया, तो यह नाटो के अंत जैसा होगा। वहीं, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन और वहां की संसद के अन्य दलों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य उसके लोगों द्वारा तय किया जाएगा।
चीन ने खुद को “निकट-आर्कटिक देश” घोषित करते हुए क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सतत विकास की बात दोहराई है। इस बीच, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रतिनिधि भी इस सप्ताह वाशिंगटन पहुंचकर वार्ता करने वाले हैं।
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