जी-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां सदस्य देशों के शीर्ष नेता हर वर्ष वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए एकत्र होते हैं। इस वर्ष जी-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन फ्रांस के खूबसूरत शहर एविएन में किया जा रहा है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 और 17 जून को भाग लेंगे।
जी-7 के सदस्य देशों में फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ भी इस मंच की बैठकों में भाग लेता है। इस समूह का उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाना है।
जी-7 की स्थापना का विचार 1970 के दशक में सामने आया था, जब दुनिया तेल संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही थी। वर्ष 1975 में पहली बार फ्रांस की राजधानी पेरिस में इस सम्मेलन का आयोजन हुआ था। उस समय इसमें केवल छह देशों ने हिस्सा लिया था। बाद में कनाडा के शामिल होने के बाद यह समूह जी-7 कहलाया।
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हर वर्ष जी-7 की अध्यक्षता सदस्य देशों के बीच रोटेशन के आधार पर बदलती है। वर्ष 2026 में इसकी अध्यक्षता फ्रांस के पास है, जबकि वर्ष 2027 में अमेरिका इस समूह की कमान संभालेगा।
भारत जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे एक महत्वपूर्ण साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया जाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मंच पर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ग्लोबल साउथ की चिंताओं और प्राथमिकताओं को मजबूती से उठाते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी पीएम मोदी विकास, जलवायु वित्त, खाद्य सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और वैश्विक आर्थिक संतुलन जैसे मुद्दों पर ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से रखेंगे।
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