दिग्गज अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए खुलासा किया है कि एक करोड़ रुपये के भारी कर्ज और आर्थिक संकट के कारण उन्हें ऐसे फिल्मी प्रोजेक्ट स्वीकार करने पड़े, जिन पर उन्हें आज भी गर्व नहीं है। उन्होंने कहा कि उस समय परिवार की जिम्मेदारियां निभाने और कर्ज चुकाने के लिए उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
एक वीडियो में सुष्मिता मुखर्जी ने एक प्रशंसक के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कुछ ऐसी फिल्में कीं, जिन्हें सेक्सिस्ट और महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया गया। उन्होंने स्वीकार किया कि वे फैसले उनकी पसंद नहीं, बल्कि मजबूरी थे।
अभिनेत्री ने भावुक होते हुए कहा, "क्या मैंने अपनी आत्मा बेच दी? बिल्कुल बेची। क्या मुझे अच्छा लगा? नहीं, तब भी अच्छा नहीं लगा और आज भी अच्छा नहीं लगता। लेकिन वह मेरी मजबूरी थी।"
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में उनके और उनके पति की मीडिया कंपनी प्रयास प्रोडक्शन बंद हो गई थी। उस समय कंपनी पर लगभग एक करोड़ रुपये का कर्ज था। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी के साथ ट्रैक सिनेमा और अनिल चौधरी प्रोडक्शन भी दिवालिया हो गए थे।
सुष्मिता ने बताया कि कंपनी के बंद होने के बाद लेनदार और रिकवरी एजेंट उनके घर पहुंचकर पैसे की मांग करते थे और अपमानजनक व्यवहार करते थे। उस समय उनके बच्चे भी बहुत छोटे थे, इसलिए उन्होंने दोबारा अभिनय शुरू किया और जो भी काम मिला, उसे स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि उस दौरान उनकी लगभग पूरी कमाई कर्ज चुकाने में चली जाती थी।
उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनके पति ने तीन से चार वर्षों तक लगातार मेहनत कर पूरा कर्ज चुका दिया। इसके अलावा उनकी बेटी की उच्च शिक्षा भी उनकी प्राथमिकता थी। उन्होंने अपनी बेटी को ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के लिए भेजा, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया।
सुष्मिता मुखर्जी ने कहा कि उन्हें अपने फैसलों के पीछे की वजह पर कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि उन्हीं संघर्षों की बदौलत वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकीं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में अलग-अलग कारणों से काम करता है और कई बार परिस्थितियां ऐसे निर्णय लेने के लिए मजबूर कर देती हैं, जो व्यक्ति की पसंद नहीं होते।
उन्होंने यह भी कहा कि अब उनकी जिंदगी बदल चुकी है और वह केवल वही काम करती हैं, जो उन्हें आत्मिक संतोष देता है। उनके अनुसार कलाकारों के पास हमेशा अपनी पसंद के प्रोजेक्ट चुनने की स्वतंत्रता नहीं होती और कई बार परिवार का पालन-पोषण ही सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाता है।
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