भारतीय रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे कमजोर होकर 87.76 पर पहुँच गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के असर से रुपया लगातार दबाव में है, हालांकि नरम अमेरिकी डॉलर ने इस गिरावट को कुछ हद तक थामने में मदद की है।
व्यापारियों ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में बदलाव की वजह से देखी जा रही है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू किए गए नए टैरिफ के कारण निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने रुपये को थोड़ी राहत दी है, जिससे स्थानीय मुद्रा पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ा।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की पूंजी निकासी और आयातकों द्वारा डॉलर की बढ़ती मांग रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। वहीं, घरेलू शेयर बाजार की हलचल और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी रुपये की चाल पर पड़ रहा है।
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अल्पावधि में रुपये की दिशा वैश्विक संकेतकों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुझान पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिकी डॉलर और अधिक कमजोर होता है, तो रुपये को स्थिरता मिल सकती है, अन्यथा दबाव जारी रह सकता है।
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