बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा को लेकर दुनिया भर के 125 से अधिक संगठनों और व्यक्तियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। यह अपील 12 फरवरी को होने वाले बांग्लादेश के आम चुनाव से ठीक पहले सामने आई है।
यह अंतरराष्ट्रीय अपील मानवाधिकार समूहों, धार्मिक संगठनों और सिविल सोसाइटी नेताओं के गठबंधन द्वारा जारी की गई है, जिसका नेतृत्व हिंदूज़ एडवांसिंग ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (HAHRI) कर रहा है। पत्र में दावा किया गया है कि मौजूदा अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं, के दौरान हिंदू समुदाय के खिलाफ व्यवस्थित उत्पीड़न हो रहा है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने स्थिति को जातीय और धार्मिक सफाए जैसा बताते हुए इस अल्पसंख्यक समुदाय के अस्तित्व पर गंभीर चिंता जताई है।
15 देशों के 125 से अधिक संगठनों और व्यक्तियों ने इस पत्र का समर्थन किया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत और अन्य वैश्विक शक्तियों से बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए तुरंत और निर्णायक कदम उठाने की मांग की गई है।
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पत्र में दीपू चंद्र दास की सार्वजनिक रूप से कथित निंदा के बाद हुई भीड़ हत्या का उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, 1947 से लेकर 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद तक हिंदू समुदाय लगातार भेदभाव, हिंसा और जबरन विस्थापन का सामना करता रहा है। इसमें 1971 के संघर्ष के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाए जाने और मंदिरों, घरों तथा व्यवसायों पर हमलों का भी जिक्र किया गया है।
पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और अधिक हाशिए पर चला जाएगा।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को राष्ट्रीय संसद के लिए चुनाव होने वाले हैं। 2024 में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी।
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