अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की इच्छा जाहिर की है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले अमेरिकी विशेष बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को कराकस से गिरफ्तार किए जाने की खबरें सामने आई थीं। वॉशिंगटन जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है। डेनमार्क इसे संभाल नहीं पाएगा। हम जल्द ही ग्रीनलैंड पर बात करेंगे।”
ट्रंप के इस बयान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई। डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने सख्त शब्दों में कहा कि अब इस तरह के दबाव और विलय की कल्पनाएं बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत हो सकती है, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय कानून और उचित प्रक्रियाओं के तहत ही होगी।
ग्रीनलैंड में ट्रंप की दिलचस्पी नई नहीं है। वर्ष 2019 में भी उन्होंने डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव रखा था, जिसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने खारिज कर दिया था।
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रणनीतिक दृष्टि से ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए बेहद अहम माना जाता है। डेनमार्क के नाटो सदस्य होने के कारण ग्रीनलैंड भी नाटो का हिस्सा है। यूरोप से उत्तरी अमेरिका तक की सबसे छोटी दूरी ग्रीनलैंड से होकर गुजरती है, जिससे यह बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है। अमेरिका पहले से ही उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड स्थित पिटुफिक स्पेस बेस में सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है।
इसके अलावा ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार हैं। एक सर्वे के अनुसार, यहां यूरोपीय आयोग द्वारा महत्वपूर्ण माने गए 34 में से 25 खनिज पाए जाते हैं, जिनमें लिथियम और दुर्लभ अर्थ तत्व शामिल हैं। हालांकि पर्यावरण कारणों से यहां तेल और गैस के दोहन पर प्रतिबंध है। ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मछली पकड़ने पर निर्भर है और उसे डेनमार्क से भारी सब्सिडी मिलती है।
कानूनी रूप से ग्रीनलैंड 1953 से डेनमार्क का क्षेत्र है और 2009 में उसे व्यापक स्वायत्तता मिली। किसी भी कानूनी बदलाव के लिए संवैधानिक संशोधन और जनमत संग्रह आवश्यक होगा।
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