उत्तर कोरिया ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा की है और इसे देश की संप्रभुता पर “गंभीर अतिक्रमण” करार दिया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, रविवार (4 जनवरी 2026) को प्योंगयांग ने इस कार्रवाई को अमेरिका की वर्चस्ववादी नीति का एक और उदाहरण बताया।
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) के जरिए जारी बयान में कहा कि वेनेजुएला में अमेरिका द्वारा की गई यह कार्रवाई उसकी “हेजेमनी स्थापित करने की मंशा” को दर्शाती है। बयान में कहा गया कि यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अमेरिका की नीति “दुष्ट और क्रूर” प्रकृति की है।
अमेरिकी विशेष बलों द्वारा किए गए सैन्य अभियान के दौरान राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई में वेनेजुएला की राजधानी कराकास और उसके आसपास के इलाकों में हवाई हमले भी किए गए। गिरफ्तारी के बाद दोनों को हेलीकॉप्टर से न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर मादक पदार्थ तस्करी और हथियारों से जुड़े मामलों में मुकदमे चलाए जाने हैं।
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उत्तर कोरिया ने कहा कि यह पूरी घटना संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है, जिनका मूल उद्देश्य संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना है। प्योंगयांग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका की इस तरह की कार्रवाइयों के खिलाफ आवाज उठाने और विरोध दर्ज कराने की अपील की।
यह घटना उत्तर कोरिया के नेतृत्व के लिए एक भयावह परिदृश्य जैसी है, क्योंकि प्योंगयांग लंबे समय से वाशिंगटन पर सत्ता परिवर्तन की साजिश रचने का आरोप लगाता रहा है। उत्तर कोरिया दशकों से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को अमेरिका द्वारा कथित सत्ता परिवर्तन के प्रयासों के खिलाफ एक निवारक कदम बताता रहा है।
उत्तर कोरिया वेनेजुएला में मादुरो की समाजवादी सरकार का मुखर समर्थक रहा है और उसने उनकी गिरफ्तारी को वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक मिसाल बताया है।
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