पाकिस्तान और चीन ने अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ “दृश्यमान और सत्यापित” कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है। दोनों देशों ने यह भी कहा कि अफगान भूमि का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाना चाहिए। यह बात सोमवार (5 जनवरी 2026) को जारी एक संयुक्त बयान में कही गई।
यह बयान पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के बाद जारी किया गया। दोनों नेताओं की यह बैठक 4 दिसंबर को बीजिंग में हुई थी। संयुक्त बयान में कहा गया कि अफगानिस्तान से संचालित आतंकी संगठन क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं और इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई बेहद जरूरी है।
चीन ने पाकिस्तान की सराहना करते हुए कहा कि उसने व्यापक आतंकवाद-रोधी उपाय किए हैं और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़े चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की है। सीपीईसी, चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का अहम हिस्सा है, जिसके तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ा जा रहा है।
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हजारों चीनी इंजीनियर और मजदूर इन परियोजनाओं में काम कर रहे हैं। वर्ष 2024 में उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में एक आत्मघाती कार बम हमले में पांच चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी, जिससे इन परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि 2021 के बाद से टीटीपी के हमले बढ़े हैं। वहीं, अफगान तालिबान इन आरोपों से इनकार करते हुए कहता है कि उसकी धरती का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाता है।
अक्टूबर में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था। बाद में कतर की मध्यस्थता से संघर्षविराम हुआ, लेकिन स्थायी समाधान अब भी नहीं निकल सका है।
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