एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने संघर्षग्रस्त गाजा पट्टी में स्वतंत्र मीडिया पहुंच पर इज़राइली सरकार द्वारा जारी प्रतिबंध की कड़ी निंदा की है। यह प्रतिक्रिया उस समय आई है, जब क्षेत्र में संघर्षविराम लागू है, इसके बावजूद विदेशी पत्रकारों को गाजा में बिना रोक-टोक प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।
फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (FPA) ने मंगलवार को जारी एक बयान में इज़राइली सरकार के रुख पर “गहरी निराशा” जताई। संगठन ने बताया कि इज़राइली सरकार ने दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि “सुरक्षा कारणों” के चलते मीडिया प्रतिबंध को बरकरार रखा जाना चाहिए।
अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से इज़राइल ने विदेशी पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से गाजा में प्रवेश करने से रोक रखा है। यह प्रतिक्रिया एफपीए की उस याचिका के जवाब में आई है, जिसमें गाजा में विदेशी पत्रकारों के लिए स्वतंत्र और निर्बाध पहुंच की मांग की गई थी।
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एफपीए, जो इज़राइल, गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों के पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करता है, ने कहा कि वह आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में एक “मजबूत जवाब” दाखिल करेगा।
एफपीए के बयान में कहा गया, “गाजा में स्वतंत्र रूप से पत्रकारों को काम करने देने और हमारे साहसी फिलिस्तीनी साथियों के साथ मिलकर रिपोर्टिंग करने की योजना पेश करने के बजाय, सरकार ने एक बार फिर हमें बाहर रखने का फैसला किया है। यह तब है, जब अब संघर्षविराम भी लागू हो चुका है।”
इज़राइली सरकार ने कहा कि उसका रुख रक्षा प्रतिष्ठान की राय पर आधारित है। सरकार का तर्क है कि पत्रकारों को गाजा में प्रवेश देने से अंतिम इज़राइली बंधक के अवशेषों की तलाश में बाधा आ सकती है। फिलहाल, केवल चुनिंदा पत्रकारों को सैन्य इकाइयों के साथ एम्बेड होकर सीमित कवरेज की अनुमति दी जाती है।
एफपीए ने सितंबर 2024 में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद अदालत ने सरकार को कई बार समय सीमा बढ़ाई। पिछले महीने अदालत ने 4 जनवरी को अंतिम समयसीमा तय की थी।
The Indian Witness के अनुसार, वर्ष 2025 में फिलिस्तीन पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक स्थान रहा, जहां 56 फिलिस्तीनी मीडिया कर्मियों की मौत हुई। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक गाजा में करीब 300 पत्रकार और मीडिया कर्मचारी मारे जा चुके हैं।
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